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भेड़िया और खरगोश की प्रेरक कहानी

wolf and rabbit story in hindi

“मेहनत और सकारात्मक सोच हमेशा फल देती है।”

बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक ताकतवर भेड़िया रहता था। वह जंगल के जानवरों को डराता और उनका शिकार करता था। वहीं उसी जंगल में एक छोटा लेकिन बहादुर और समझदार खरगोश रहता था। भेड़िया अपने ताकत और शेर जैसी दहाड़ पर बहुत गर्व करता था, लेकिन उसकी एक कमजोरी थी कि वह आलसी और जल्दबाज़ था।

एक दिन भेड़िया ने सोचा कि आज वह खरगोश को पकड़ेगा, क्योंकि वह बहुत चालाक होने के बावजूद छोटा था। वह खरगोश का पीछा करने लगा। पर खरगोश ने अपनी सूझ-बूझ से भेड़िये से कहा, “भेड़िया भाई, तुम मुझसे पहले कई बार हार चुके हो, क्यों न हम बात करके यह समस्या हल करें? क्या तुम्हें पता है कि जंगल के बाहर एक और भेड़िया है जो तुमसे भी ज्यादा ताकतवर है।”

भेड़िया को यह सुनकर जलन हुई और वह उस भेड़िये को ढूंढने चला गया। खरगोश ने समय रहते जंगल के बीच एक गहरे कुएं का रास्ता दिखाया और कहा, “वहां जा कर देखो।” भेड़िया ने कुएं में देखा और अपनी परछाई को दूसरे भेड़िये समझ कर उसमे हमला कर दिया और खुद ही उसमें फंस गया।

नैतिक शिक्षा

यह कहानी हमें सिखाती है कि असली ताकत शरीर की नहीं, बल्कि बुद्धि और सूझ-बूझ की होती है। हर परिस्थिति में समझदारी से काम लेना ही बुद्धिमान व्यक्ति की निशानी है।

“मेहनत और सकारात्मक सोच हमेशा फल देती है।”

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” (तुम्हारा कर्म करने में अधिकार है, फल में नहीं।)

“तैयारी और सूझ-बूझ जीवन में बड़ी ताकत होती है।”

“अभ्यास से ही महारत हासिल होती है।”

“जो डरते हैं, वे हारते हैं। जो कोशिश करते हैं, वे जीतते हैं।”

“समझदारी और चतुराई बलवान से भी बलवान होती है।”

“असली ताकत शरीर की नहीं, बल्कि बुद्धि और सूझ-बूझ की होती है।”

“हर परिस्थिति में समझदारी से काम लेना ही बुद्धिमान व्यक्ति की निशानी है।”

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