
एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि एकादशी के दिन व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हर माह दो एकादशी आती हैं—
- शुक्ल पक्ष की एकादशी
- कृष्ण पक्ष की एकादशी
फरवरी 2026 में भी दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ रहे हैं, जिन्हें जया एकादशी और विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।
फरवरी 2026 में एकादशी की तिथियां
1. जया एकादशी 2026
- तिथि: मंगलवार, 3 फरवरी 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 2 फरवरी 2026, रात 09:08 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 3 फरवरी 2026, रात 06:10 बजे
- पारण समय (व्रत खोलने का शुभ समय): 4 फरवरी 2026, सुबह 07:10 से 09:30 बजे तक
महत्व:
जया एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
2. विजया एकादशी 2026
- तिथि: गुरुवार, 19 फरवरी 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 18 फरवरी 2026, दोपहर 01:15 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 19 फरवरी 2026, दोपहर 03:25 बजे
- पारण समय: 20 फरवरी 2026, सुबह 06:55 से 09:15 बजे तक
महत्व:
विजया एकादशी का व्रत विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता के लिए किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
एकादशी व्रत की पूजा विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- व्रत का संकल्प लें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखें।
- रात्रि में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- अगले दिन पारण समय में व्रत खोलें।
एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें
करें:
- सात्विक भोजन करें
- भजन-कीर्तन और विष्णु पूजा करें
न करें:
- चावल और तामसिक भोजन का सेवन
- झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचार
फरवरी 2026 एकादशी का ज्योतिषीय महत्व
फरवरी 2026 में आने वाली एकादशी तिथियां ग्रहों की अनुकूल स्थिति में पड़ रही हैं, जिससे इन व्रतों का फल कई गुना बढ़ जाता है। खासकर व्यापार, नौकरी और स्वास्थ्य से जुड़े लोगों के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
FAQs – एकादशी 2026 से जुड़े सवाल
Q1. फरवरी 2026 में कितनी एकादशी हैं?
फरवरी 2026 में दो एकादशी हैं – जया एकादशी और विजया एकादशी।
Q2. क्या एकादशी का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?
नहीं, श्रद्धालु अपनी क्षमता अनुसार फलाहार या जल ग्रहण कर सकते हैं।
Q3. एकादशी का पारण कब करना चाहिए?
एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करना शुभ होता है।
Q4. एकादशी व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
मान्यता है कि इससे पापों का नाश, मानसिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
Q5. क्या महिलाएं और बुजुर्ग भी एकादशी व्रत रख सकते हैं?
हां, स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए महिलाएं और बुजुर्ग भी यह व्रत रख सकते हैं।
