यहाँ किसान और जमींदार पर दो सर्वश्रेष्ठ लघु कथाएँ प्रस्तुत हैं, जिनमें किसान की ईमानदारी, मेहनत, और जमींदार की चालाकी व अंततः न्याय का संदेश मिलता है:

कहानी 1: श्यामू और चालाक जमींदार
एक गाँव में एक चालाक जमींदार रहता था जो किसानों का शोषण करता था। श्यामू नाम के किसान ने जमींदार से जमीन खेती के लिए ली, और शर्त थी कि फसल की आधी हिस्सा जमींदार को देना होगा। कटाई पर जमींदार ने बेईमानी से अच्छी फसल का आधा हिस्सा लिया, और श्यामू को खराब हिस्सा दिया। अगले साल श्यामू का बेटा हरीश शहर से लौटा और उसने खेती की जिम्मेदारी ली। हरीश ने ऐसी तरकीब लगाई कि अगली बार फसल की अच्छी क्वालिटी जमींदार को न मिल सके और गाँव वालों के सामने जमींदार की चाल खुल गई। अंततः जमींदार ने publicly माफी मांगी और किसानों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करने का वादा किया.
कहानी 2: गरीब किसान रामू और कंजूस जमींदार
रामू नाम का एक गरीब किसान था, जो कड़ी मेहनत से अपने छोटे खेत में परिवार का गुज़ारा करता था। गाँव का जमींदार बहुत अमीर लेकिन कंजूस था, और अपने खेतों में काम करवाने पर किसानों को बहुत कम पगार देता था। एक बार सूखा पड़ने पर रामू ने मजबूरी में जमींदार से कर्ज मांगा, पर जमींदार ने कर्ज देने से इंकार कर रामू को अपने खेत में कम पगार पर काम करने पर मजबूर किया। रामू ने ईमानदारी व मेहनत से काम किया, धीरे-धीरे सभी को उसकी मेहनत का सम्मान मिला और रामू की ईमानदारी ने गांव में मिसाल कायम की.
नैतिक संदेश
