पात्र:
- अंकित: एक उत्साही और जिद्दी लड़का, जो अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।
- उम्मीद: अंकित की कल्पनाशील मित्र, जो हमेशा उसे प्रोत्साहित करती है।
- चिंता: अंकित का डर और निराशा, जो उसे पीछे खींचती है।

अंकित एक छोटे शहर का लड़का था, जिसे बड़ा होकर कुछ बड़ा करना था। वह हर दिन अपने सपने के बारे में सोचता, लेकिन उसके अंदर चिंता भी रहती थी कि क्या वह सफल हो पाएगा? एक दिन अंकित की कल्पनाशील मित्र, उम्मीद, उससे बोली, “अंकित, चलो हम साथ में एक यात्रा शुरू करते हैं, जिसमें हम न डरेंगे और न हार मानेंगे।”
जब अंकित डर से घिरा हुआ था, चिंता ने कहा, “तुम यह नहीं कर पाओगे, यह तुम्हारे बस की बात नहीं।”
तो उम्मीद ने मुस्कुराते हुए कहा, “देखो अंकित, डर को चुनौती दो, और मैं तुम्हारे साथ हूं।”
अंकित ने अपने दिल की आवाज सुननी शुरू की और उम्मीद की बात मानी। उसने छोटे-छोटे कदम उठाए, फेल भी हुआ, लेकिन उम्मीद ने उसे सिखाया कि हार सफलता की पहली सीढ़ी है।
धीरे-धीरे अंकित ने निरंतर मेहनत की और अपने सपनों को हकीकत में बदलते देखा। चिंता पीछे हट गई और उम्मीद ने उसे नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ाया।
नैतिक:
सपनों को पूरा करने के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास से भरी यात्रा आवश्यक है। डर और चिंता को हराकर सफलता की ओर बढ़ना ही असली जीत है। उम्मीद को अपने साथ रखें और अपने सपनों को सच करने से कभी मत डरें।
