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आख़िरी पन्ना

the last page motivational short story in hindi

“समय किसी का इंतजार नहीं करता। समय से आगे बढ़ने वाले केवल वे लोग होते हैं जिन्होंने अपने डर को चुनौती दी है।”

एक छोटी सी कहानी जो बदल देगी आपका जीवन

प्रथम अध्याय – डर की गिरफ्त

राघव ने किताब का पहला पन्ना बंद किया और आस-पास देखा। कमरे में सबसे ज्यादा चीज़ें उसकी टेबल पर रखी पुरानी पुस्तकों का ढेर था। लेकिन आज वह किताबों का ढेर कुछ भी नहीं लग रहा था। अंदर एक अजीब-सी बेचैनी और डर घर कर रहा था।

कल उसके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा थी। कॉलेज की अंतिम परीक्षा, जिसमें वह पास नहीं हुआ तो उसके सपनों का शहर, सपनों की पढाई… सब धूप-छाँव की तरह खिसक जाएंगे।

“क्या मैं कर पाऊँगा? क्या ये डर मुझे निगल जाएगा?” उसने खुद से पूछा। आँखें नम थीं पर जवाब कहीं नहीं था।

उस रात जैसे दिनभर की थकान ने उसका मन घेर लिया। बार-बार नोटबुक खोलकर पढ़ना, लेकिन कोई चीज़ समझ में नहीं आ रही थी। उसका दिमाग भारी था, शरीर थका हुआ। वह झपकी लेने लगा, लेकिन फिर भी बेचैनी ठीक नहीं हो रही थी। रात के सन्नाटे में सिर्फ एक आवाज़ थी—अपना डर।

द्वितीय अध्याय – रहस्यमयी किताब

राघव जब गुस्से में किताब बंद कर रहा था कि अचानक अलमारी का दरवाज़ा अपने आप चरमरा गया। वह झटका सा खा गया। धीरे-धीरे दरवाज़ा खुला और उसके सामने एक पुरानी, धूल भरी किताब गिर पड़ी। कवर पर लिखा था— “आख़िरी पन्ना”

उसने अपने आप से कहा, “इतनी देर तक नसीहत, शायद ये किताब कुछ कहेगी।” और जिज्ञासा से भरा उसने किताब खोली।

पहले पन्ने पर लिखा था—

“यह उन लोगों के लिए है जो हार मानने से पहले इसे पढ़ेंगे।”

राघव की दिल की धड़कनें तेज हो गईं। उसने डायरी की तरह पन्ना पलटा।

“जब इंसान डर से भागता है, तो वह डर उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। जब वही इंसान डर से टकराता है, तो डर उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।”

राघव को लग रहा था जैसे कोई उसके मन की बात कह रहा हो। कई बार उसने कठिन परिस्थितियों से भागा था—इम्तिहान में, प्रतियोगिताओं में, यहां तक कि अपने सपनों से भी।

तृतीय अध्याय – डर से लड़ाई

“समय किसी का इंतजार नहीं करता। समय से आगे बढ़ने वाले केवल वे लोग होते हैं जिन्होंने अपने डर को चुनौती दी है।”

फिर एक पन्ना और पलटते हुए राघव सोचने लगा— क्या यह डर ही उसकी सब समस्याओं की जड़ है? वह बार-बार सोचता था कि पकड़ा जाएगा, विफल होगा, झूठा साबित होगा।

लेकिन किताब कह रही थी, “डर से भागना बंद करो, टकराओ उससे। जीत उसी की होती है।”

उसने गहरी सांस ली और अपने डर का सामना करने का निर्णय किया। आज रात्रि वह पहली बार अपने डर को देखने और समझने का साहस जुटा पाया।

चतुर्थ अध्याय – आख़िरी पन्ना

अचानक हवा का तेज़ झोंका आया और किताब का आख़िरी पन्ना अपने आप खुल गया। वहाँ लिखा था—

“हर इंसान के जीवन में एक आख़िरी पन्ना होता है। जब वह पन्ना पलटता है, तब उसके जीवन का नया अध्याय शुरू होता है। यदि तुम डर से हार गए, तो यह किताब यहीं रहेगी; यदि सफल हुए, तो यह मिट जाएगी।”

राघव ने मन ही मन ठाना कि वह उस आख़िरी पन्ने को पलटने का साहस करेगा।

पंचम अध्याय – परीक्षा का दिन

अगली सुबह, सूरज की रोशनी ने उम्मीद की किरणों को अपने साथ लाया। राघव ने पूरे मन से तैयारी की। परीक्षा हॉल में जब पेपर मिला, तो पहली बार उसका दिल डर से नहीं बल्कि उम्मीद से भर गया था।

सभी कठिन सवाल आए, पर राघव ने घबराया नहीं। उसने गहरी सांस लेकर अपने ज्ञान और साहस का प्रयोग किया। उसने खुद से कहा—“मैं दूसरों को नहीं, अपने डर को हराने आया हूँ।”

घंटी बजी, सबने कॉपी जमा कर दी, लेकिन राघव के चेहरे पर शांति और आत्मविश्वास था। वह जान चुका था कि अब उसका जीवन बदल चुका है।

षष्ठम अध्याय – किताब का रहस्य

घर वापस आते ही राघव ने अलमारी में जमीन पर ढूंढा, लेकिन किताब न थी। ऐसा लगा जैसे वह कभी थी ही नहीं। वह मुस्कुराया—क्या सच में वह किताब नहीं थी? या यह मेरा मन था जो मुझे मार्ग दिखा रहा था?

कुछ महीनों बाद राघव ने एक किताब प्रकाशित की, जिसका नाम था— “आख़िरी पन्ना”। वह सफल लेखक बन चुका था। उसकी कहानी ने कई लोगों को प्रेरित किया।

सप्तम अध्याय – नयी शुरुआत

राघव अब बताता था, “जीत आपकी डर से लड़ने की हिम्मत में है। हार कभी अंतिम नहीं होती, जब तक आप हार ना मान लें। हर किसी के जीवन में एक आख़िरी पन्ना होता है… बस उसे पलटना बाकी रहता है।”

घरों, स्कूलों, कॉलेजों में लोग उसकी कहानी सुनते और सीखते थे कि कैसे वे अपने अंदर के डर को हरा सकते हैं और अपनी ज़िंदगी के नए अध्याय लिख सकते हैं।

उपसंहार

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जिसे अपनी हिम्मत, अपने सपनों और अपने डर से लड़ना है। राघव जैसी कहानी हमें सीखाती है कि असली ताकत डर से लड़ने में है, और हर आख़िरी पन्ना एक नयी शुरुआत का संदेश देता है।

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