Loading...

1 Amazing Story: माथे का टीका | The Mark of Faith

हर सुबह पूजा घर में दीपक जलाने से पहले, दादी हमेशा अपने माथे पर चंदन का टीका लगाती थीं। घर के सभी बच्चे उनकी यह आदत देखकर मुस्कुराते थे। लेकिन एक दिन, पोते आर्यन ने बड़े मासूम चेहरे से पूछा –
“दादी, ये टीका हर दिन क्यों लगाती हो? इसमें आखिर ऐसी क्या बात है?”

the mark of faith

“जो खुद पर भरोसा रखता है, उसके माथे पर हमेशा विजय का टीका चमकता है।”

दादी मुस्कुराईं, उन्होंने चंदन की डिब्बी से थोड़ा सा चंदन लिया और आर्यन के माथे पर लगाते हुए बोलीं –
“बेटा, यह सिर्फ एक चिन्ह नहीं है। यह तेरे अंदर के विश्वास, धैर्य और अच्छाई का प्रतीक है।”

यह सुनकर आर्यन सोच में पड़ गया। वह 12 साल का था, पढ़ाई में अच्छा लेकिन आत्मविश्वास में थोड़ा कमजोर। छोटी-छोटी असफलताएँ उसे परेशान करतीं, और वह जल्दी हार मान लेता था।

अध्याय 1: पहला अनुभव

अगले दिन स्कूल में विज्ञान प्रोजेक्ट की प्रतियोगिता थी। आर्यन ने बहुत मेहनत की थी, लेकिन उसके प्रोजेक्ट के खास हिस्से में करंट नहीं चल रहा था। वह उदास होकर बैठ गया। तभी उसे याद आया – दादी ने कहा था, “टीका तेरे माथे का नहीं, तेरे मन का साहस है।”

उसने अपने माथे पर हल्के से चंदन लगाया, गहरी साँस ली, और सोचने लगा, “मुझे हार नहीं माननी चाहिए।” उसने वायर दोबारा जोड़ीं, सर्किट ठीक किया – और देखते ही देखते उसका प्रोजेक्ट चल पड़ा। उसी दिन उसे “Best Innovation Award” मिला।

जब उसने ट्रॉफी हाथ में ली, तो दादी की मुस्कान उसकी आँखों के सामने थी।

अध्याय 2: समय के साथ सीख

वक्त बीतता गया। आर्यन बड़ा हुआ, और अब कॉलेज में इंजीनियरिंग पढ़ रहा था। वह हर परीक्षा, हर चुनौती से पहले अपनी दादी से सीखा टीका लगाना नहीं भूलता था। कुछ दोस्त मज़ाक भी उड़ाते —
“अरे यार, अब भी टीका लगाता है? ये तो पुरानी सोच है!”

पर आर्यन बस मुस्कुरा देता और मन ही मन कहता —
“माथे का टीका मेरी परंपरा नहीं, मेरी पहचान है।”

एक दिन कॉलेज में प्रस्तुति के समय उसका लैपटॉप फ्रीज़ हो गया। सभी घबरा गए। पर आर्यन ने शांत मन से कहा —
“हम कोशिश करेंगे, डरेंगे नहीं।”

वह मंच पर खड़ा होकर बिना लैपटॉप के अपनी प्रोजेक्ट की पूरी कल्पना समझा गया। अंत में तालियों की गूंज ने दिखा दिया — असली शक्ति माथे के टीके में नहीं, बल्कि विश्वास में होती है।

अध्याय 3: जीवन की असली परीक्षा

कुछ साल बाद, आर्यन एक युवा इंजीनियर बन गया। उसने समाज के बच्चों के लिए एक “Innovation Camp” शुरू किया, जहाँ वह उन्हें सिखाता — “विज्ञान सिर्फ मशीन नहीं, सोच है।”

कैंप के पहले दिन सभी बच्चे मुस्कुरा रहे थे, लेकिन एक बच्चा उदास था। कारण पूछने पर उसने कहा —
“सर, मैं कुछ भी नहीं कर सकता। मैं हमेशा गलत कर देता हूँ।”

आर्यन ने धीरे से उसकी जेब से टिफिन पेपर का एक छोटा टुकड़ा निकाला, उसे चंदन में डुबोया और बच्चे के माथे पर लगाया।
“ये कोई जादू नहीं है, बेटा। बस याद रख — हर बार जब तू डर महसूस करे, तो माथे का ये टीका छूकर अपने आप से बोल, ‘मैं कर सकता हूँ।’”

वो बच्चा मुस्कुराया — और कुछ हफ्तों बाद उसी बच्चे ने सबसे अच्छा रोबोट मॉडल बनाया।

अध्याय 4: दादी की आशीर्वाद

कुछ दिनों बाद आर्यन घर लौटा। दादी बहुत कमजोर हो चुकी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा —
“देखा बेटा, यह छोटा सा टीका तुझे कितना बड़ा बना गया।”

आर्यन की आँखें भर आईं। उसने झुककर दादी के चरण छुए और बोला —
“दादी, अब समझ आया — माथे का टीका सिर्फ आस्था नहीं, आत्मबल का प्रतीक है। इसने मुझे हर बार खुद से मिलवाया।”

प्रेरक विचार (Quotes)

“माथे का टीका बाहरी पहचान नहीं, भीतरी विश्वास की है।”

“जहाँ माथे पर विश्वास का टीका होता है, वहाँ डर अपना रास्ता भूल जाता है।”

“टीका चंदन से नहीं बनता, यह संकल्प से बनता है।”

“जो खुद पर भरोसा रखता है, उसके माथे पर हमेशा विजय का टीका चमकता है।”

माथे का टीका हमें याद दिलाता है कि हर संघर्ष के बाद एक सांत्वना का प्रकाश आता है।”

नैतिक संदेश

माथे का टीका सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं है। यह उस अदृश्य शक्ति का प्रतीक है जो हमें दृढ़ता, विनम्रता और आत्मविश्वास देती है।
हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा कोई ‘टीका’ होना चाहिए — चाहे वह विश्वास का हो, अनुशासन का, या मेहनत का। जो मन के द्वार पर टिक जाए और हमें हर परिस्थिति में याद दिलाए:
“हारना विकल्प नहीं है।”

Leave a Comment

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

Bot