घने जंगल के बीच एक ऊँचे पहाड़ पर बाज का एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक छोटा बाज भी था, जिसका नाम अर्जुन था। बाकी बाज जहाँ आसमान में ऊँची उड़ान भरते थे, वहीं अर्जुन हमेशा डरता रहता था। उसे लगता था कि वह कभी उड़ नहीं पाएगा।

हर दिन वह अपने माता-पिता को बादलों के ऊपर उड़ते देखता और मन ही मन सोचता, “काश मैं भी इतनी ऊँचाई तक जा पाता।”
एक दिन उसकी माँ ने कहा,
“अगर आसमान को छूना है, तो डर को छोड़ना होगा।”
लेकिन अर्जुन का डर कम नहीं हुआ। वह पहाड़ के किनारे तक जाता, नीचे देखता और वापस लौट आता।
कुछ दिनों बाद जंगल में भयंकर तूफान आया। तेज हवाएँ चलने लगीं। अर्जुन का घोंसला हिलने लगा। तभी अचानक एक तेज हवा का झोंका आया और अर्जुन पहाड़ से नीचे गिरने लगा।
डर के मारे उसकी आँखें बंद हो गईं। लेकिन तभी उसे अपनी माँ की बात याद आई —
“बाज तूफानों से नहीं डरते, वे तूफानों का इस्तेमाल और ऊँचा उड़ने के लिए करते हैं।”
अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और अपने पंख फैलाए। धीरे-धीरे उसका शरीर हवा में संतुलित होने लगा। कुछ ही पलों में वह गिरना बंद कर चुका था। अब वह उड़ रहा था।
पहले थोड़ा डर लगा, लेकिन फिर उसने महसूस किया कि आसमान कितना खूबसूरत है। वह बादलों के ऊपर निकल गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।
उस दिन अर्जुन समझ गया कि डर हमारी सबसे बड़ी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी परीक्षा होता है। जो इंसान अपने डर को जीत लेता है, वही जिंदगी में सबसे ऊँची उड़ान भरता है।
सीख
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