Hindi Poetry

hindi poetry

Hindi Poetry (हिंदी कविता):
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poetry 014

आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो…
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो…
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंजिलें…
रास्ते आवाज देते हैं सफर जारी रखो..!
एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों..
दोस्ताना जिंदगी से मौत से यारी रखो..!!

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ना जाने क्यों आती है
याद तुम्हारी
चुरा ले जाती है आँखों
से नींद हमारी…
अब यही ख्याल रहता है
सुबह शाम
कब होगी तुमसे
मुलाकात हमारी..!!
💔🥀

रुकने की ख्वाहिश ✨
ठहरो ज़रा, ये पल यूँ ही गुजरने न दो,
थोड़ी सी बातें हैं, इन्हें बिखरने न दो।
अभी तो सुकून मिला है तेरी मौजूदगी में,
इतनी जल्दी इन लम्हों को मरने न दो।
दिल के कोने में जो खामोशियाँ बैठी हैं,
आज उन्हें भी ज़रा संवरने तो दो।
जाना तो तय है एक दिन सबको यहाँ से,
पर आज की शाम यूँ ही ढलने न दो।
पास हो तुम, तो ये वक्त भी खूबसूरत लगे,
थोड़ी देर और सही… खुद को ठहरने तो दो।
…………………….. 💕 ……………………..

कभी हम भी बहुत खुश रहा करते थे,
हर छोटी बात पर मुस्कुरा देते थे।
जिन्हें अपना समझा था दिल से,
उनके लिए दुनिया भुला देते थे।
पर वक़्त ने ऐसा मोड़ लिया,
कि सब कुछ बदल सा गया।
अब ना कोई अपना लगता है,
ना ही कोई सपना लगता है।
बस खुद में ही सिमट गए हैं हम,
क्योंकि यही सच लगता है।

जिंदगी ने दिल से धीरे कहा
थोड़ा खुद को समझना सीखो…
हर अपने को अपना मत मानो
कुछ चेहरों को परखना सीखो…
जो पास दिखे, वो साथ नहीं
ये सच भी अब जानना सीखो…
उम्मीदें कम, हौसले रखो
खुद पर ही टिकना सीखो…
दिल टूटे तो शोर न करना
चुप रहकर भी जीना सीखो…

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कबूल है जिंदगी का हर तोहफ़ा मैंने
ख्वाहिशों का नाम, बताना छोड़ दिया
जो दिल के करीब हैं, वो मेरे अजीज़ है मैंने
गैरों पे हक़, जताना छोड़ दिया
जो समझ ही नहीं सकते दर्द मेरा मैंने उन्हें
ज़ख्म, दिखाना छोड़ दिया
जो गुजरती हैं दिल पे, हक़ीक़त हैं मेरी मैंने
दिखावे के लिए, मुस्कुराना छोड़ दिया
जो महसूस ही नहीं करते ज़रूरत मेरी मैंने
उनका साथ, निभाना छोड़ दिया
जो चाहते है रहना बस नाराज़ मुझसे मैंने
उन्हें बार बार, मनाना छोड़ दिया
जो मेरे अपने हैं, वो मिलेंगे ज़रूर मुझे मैंने
बेवजह बंदिशें, लगाना छोड़ दिया

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उम्मीद का दिया जलाए रखो…
अँधेरा खुद हार जाएगा,
हिम्मत से कदम बढ़ाते रहो…
सफर आसान होता जाएगा,
रुकना नहीं मुश्किलों से डरकर…
ये वक्त एक दिन बदल जाएगा,
छोड़ना नहीं कभी कोशिशों को…
हर सपना साकार हो जाएगा।।

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चलो हंसने की कोई,
हम वजह ढूंढते हैं,
जिधर न हो कोई ग़म,
वो जगह ढूंढते हैं
बहुत उड़ लिए ऊँचे आसमानों
में यारो, चलो ज़मीं पे ही कहीं,
हम सतह ढूंढते हैं
छूटा संग कितनों का ज़िंदगी की जंग में,
चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं।
बहुत वक़्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में,
चलो अँधेरी रात की, हम सुबह ढूंढते हैं!

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गीता में लिखा है..
जिस वक्त आप चारों तरफ से समस्याओं से घिर जाओ
तो समझ लेना आपके जीवन का सबसे बड़ा परिवर्तन होने वाला है..!!

poetry 14

आपका तनाव व्यर्थ है
जन्म देते ही माता पिता
बच्चे के लिए जीवन भर की
योजना बनाते है की
उसे कभी तकलीफ ना हो।
जरा सोचिए जिसने दुनिया बनाई है
उसने तुम्हारे लिए कितनी
योजनाएं बनाई होंगी।
बेवजह तनाव में मत रहिए।
सब पहले से तय है, इसे स्वीकार करे..!

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हर रात लंबी लगती है…
मगर सुबह का होना तय है,
ठहरता नहीं ये वक़्त कहीं…
जिंदगी का बदलना तय है,
कभी सुख है, कभी दुःख है…
ये सिलसिला यूँ ही चलना तय है,
जो आज मुश्किल लग रहा है…
कल उसका सुलझना तय है।।

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“गर्म दोपहर की
ठंडी शाम हो तुम,

मेरे दिल का सुकून,
मेरे दिल का आराम हो तुम।

तुम हो तो सब कुछ
है जिंदगी में,

मेरी खुशियों का
दूसरा नाम हो तुम..!!”

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अच्छा लगता है अकेले बैठकर
अपने बीते हुए पलों को याद करना
कभी-कभी बीते पल ही सबसे ज्यादा
सुकून देते हैं। यादों में खो जाना भी एक
तरह की शांति है।
कुछ पल… बस दिल में ही अच्छे लगते हैं।
अच्छा लगता है… जब ज़िंदगी थोड़ी देर
के लिए पीछे मुड़कर देखती है।
यादें भी क्या कमाल की होती हैं, दर्द भी
देती हैं और सुकून भी।

“सुन…
तू थका नहीं है…
तू आलसी हो गया है।
तू busy नहीं है…
तू distractions में खोया हुआ है।
तू unlucky नहीं है…
तू consistent नहीं है।
कड़वा है?
हां… लेकिन सच है।
दूसरे लोग भी तेरी तरह ही हैं—
उन्हें भी दिक्कत है,
उन्हें भी डर लगता है…
फिर भी वो काम कर रहे हैं।
और तू?
सोच रहा है… प्लान बना रहा है…
लेकिन action नहीं ले रहा।
याद रख—
सपने देखने से कुछ नहीं होता।
या तो तू आज से बदल जाएगा…
या फिर हमेशा ऐसे ही रहेगा।
कोई आएगा नहीं तुझे उठाने…
खुद उठ…
और आज से नहीं…
अभी से शुरू कर”
💀🔥💀

इश्क ने इंसान को क्या बना दिया
किसी को कवि तो किसी को कातिल बना दिया
दो फूलों का बोझ न उठा सकी थी मुमताज़
और शाहजहां ने उसकी याद में ताजमहल बनवा दिया

“चलते रहो, बढ़ते रहो”
जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं,
कभी खुशी, कभी कठिनाई लेकिन
रुक जाना कभी समाधान नहीं होता
क्योंकि समय हमेशा आगे बढ़ता है।
और हमें भी उसके साथ चलना
होता है, याद रखिए हर दिन आपको
कुछ सिखाता है, हर अनुभव
आपको मजबूत बनाता है। इसलिए
अपनी कमजोरियों से डरना नहीं
उन्हें सुधारना सीखो और हर दिन
खुद को बेहतर बनाओ क्योंकि
जो लगातार आगे बढ़ता है। वही
एक दिन सफलता पाता है और अंत
में रुकना नहीं है, खुद को निखारते
हुए आगे बढ़ते जाना है।

मेरे मन तू क्यों रोता है,
जो लिखा है वही होता है,
रास्ते बस और खुलते है
जब एक बंद होता है।

जिन पेड़ों पर फल नहीं होते,
क्या वहां चिड़ियों का बसेरा नहीं होता है?
हिम्मत हारने से तुझे क्या मिलेगा,
रात के बाद ही तो सवेरा होता है।

कितनी भी उड़ान भर ले आसमान में,
मिलना तो सबको ज़मीं पर ही होता है।
मत मायूस हो दुनिया की क्रूरता
खुद पर पाकर,
सुना है जिसका कोई नहीं होता
उसका भगवान होता है..

थोड़ा सोचूं फिर एक बात लिखूं
जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं
तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूं
या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूं
तुझे देखूं फिर तेरी बात लिखूं
तारीफ़ लिखूं या फ़रियाद लिखूं
तेरे पीछे खुद को आबाद लिखूं
या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूं
तुझे दिन या खुद को रात लिखूं
बता आज कौनसी बात लिखूं

चाँद भी क्या खूब है
न सर पर घूंघट है
न चेहरे पे बुर्का
कभी करवाचौथ का हो गया।
तो कभी ईद का
तो कभी ग्रहण का
अगर
ज़मीन पर होता तो
टूटकर विवादों में होता
अदालत की सुनवाईयों में होता
अखबार की सुर्खियों में होता

हौसलों में कैद आसमान रख परिंदों
से ऊंची उड़ान रख,
छोटी सही पर भीड़ से हटकर एक
अपनी अलग पहचान रख
अगर बच्चों से कुछ उम्मीदें है तो पहले
बुजुर्गों का मान रख,
सत्य, इंसानियत समझ ले बस जरूरी
नहीं तू गीता-कुरान रख,
जिस ताल्लुक की उम्र बढ़ानी हो एक
फासला उसके दरम्यान रख,

किसी को नफरत है मुझसे
और कोई प्यार कर बैठा है
किसी को यकीन नहीं मेरा
और कोई ऐतबार कर बैठा है
कितनी अजीब है ना ये दुनिया
कोई मिलना नहीं चाहता मुझसे
और कोई इन्तजार करने बैठा है

कुछ गुज़री,
कुछ गुज़ार दी.!
कुछ निखरी,
कुछ निखार दी.!
कुछ बिगड़ी,
कुछ बिगाड़ दी.!
कुछ अपनी रही,
कुछ अपनों पर वार दी.!
कुछ इश्क में डूबी,
कुछ इश्क ने तार दी.!
कुछ दोस्त साथ रहे,
कुछ कसर दुश्मनों ने उतार दी.!
बस…
ज़िन्दगी जैसी मिली,
ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..

मिट्टी से भी यारी रख,
दिल से दिलदारी रख।
चोट न पहुंचे बातों से,
इतनी समझदारी रख।
पहचान हो तेरी हटकर,
भीड़ में कलाकारी रख।
पलभर ये जोश जवानी का,
बुढ़ापे की भी तैयारी रख।
दिल सबसे मिलता नहीं,
फिर भी जुबान प्यारी रख।

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