पहली बाँसुरी की धुन

कृष्ण ने पहली बार बाँसुरी बजाई, उसकी मधुर धुन पूरे वृंदावन में गूँज उठी। राधा उस स्वर को सुनते ही मोहित हो गईं और अपने मन से बोलीं – “ये तो मेरे कानों के लिए नहीं, मेरे हृदय के लिए है।”
उस दिन से बाँसुरी, राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक बन गई।

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पहली बाँसुरी की धुन

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पहली बाँसुरी की धुन

FAQ

कृष्ण की बाँसुरी इतनी प्रसिद्ध क्यों है?

क्योंकि उसकी मधुर धुन प्रेम, भक्ति और शांति का प्रतीक मानी जाती है।

राधा कृष्ण की प्रेम कथा का क्या महत्व है?

यह निस्वार्थ प्रेम और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है।

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