अंधा घोड़ा

एक गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास एक बूढ़ा घोड़ा था। वह घोड़ा एक आँख से अंधा था, इसलिए गाँव वाले उसे “अंधा घोड़ा” कहकर मज़ाक उड़ाते थे। लोग कहते थे कि ऐसा घोड़ा किसी काम का नहीं।

अंधा घोड़ा

लेकिन रामू अपने घोड़े से बहुत प्यार करता था। वह रोज़ उसे खाना खिलाता, उसकी देखभाल करता और कहता, “तू मेरे लिए भाग्यशाली है।”

एक दिन गाँव में घुड़दौड़ प्रतियोगिता होने वाली थी। विजेता को बड़ा इनाम मिलने वाला था। गाँव वालों ने रामू का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “क्या तुम अपने अंधे घोड़े को दौड़ में भेजोगे?”

रामू मुस्कुराया और बोला, “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।”

दौड़ शुरू हुई। बाकी घोड़े तेज़ी से भाग रहे थे। रामू का घोड़ा धीरे-धीरे दौड़ रहा था। तभी अचानक रास्ते में एक बड़ा गड्ढा आ गया। तेज़ दौड़ने वाले कई घोड़े उसमें फँस गए, लेकिन रामू का घोड़ा धीरे चल रहा था, इसलिए उसने रास्ता बदल लिया और सुरक्षित आगे निकल गया।

धीरे-धीरे वह सबसे आगे पहुँच गया और अंत में वही दौड़ जीत गया।

गाँव वाले हैरान रह गए। जो लोग पहले उसका मज़ाक उड़ाते थे, अब उसकी तारीफ़ कर रहे थे।

रामू ने सबको कहा,

“किसी की कमी देखकर उसका मज़ाक मत उड़ाओ। हर किसी में कोई न कोई खासियत जरूर होती है।”

सीख

किसी की कमजोरी को देखकर उसे कमज़ोर नहीं समझना चाहिए। मेहनत, धैर्य और विश्वास से हर मुश्किल जीती जा सकती है।

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