एक गांव में एक बहुत बड़ा हाथी रहता था। वह इतना ताकतवर था कि अगर चाहे तो एक ही झटके में पेड़ उखाड़ दे। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि उसे एक छोटी-सी रस्सी से बांधकर रखा जाता था। गांव वाले रोज यह देखकर सोचते कि इतना विशाल हाथी आखिर इस पतली रस्सी को तोड़कर भाग क्यों नहीं जाता?

एक दिन गांव में आए एक युवक ने हाथी के मालिक से यही सवाल पूछा।
मालिक मुस्कुराया और बोला,
“जब यह हाथी छोटा था, तब इसे इसी रस्सी से बांधा जाता था। उस समय यह बहुत कोशिश करता था, लेकिन रस्सी तोड़ नहीं पाता था। धीरे-धीरे इसके मन में यह बात बैठ गई कि यह रस्सी कभी नहीं टूट सकती। अब यह बड़ा और ताकतवर हो चुका है, लेकिन आज भी इसे लगता है कि वह रस्सी नहीं तोड़ सकता।”
युवक यह सुनकर सोच में पड़ गया।
उसे एहसास हुआ कि इंसान भी बिल्कुल इसी हाथी की तरह होता है। कई बार जिंदगी में एक-दो बार असफल होने के बाद हम मान लेते हैं कि अब हम कुछ नहीं कर सकते। फिर चाहे हमारे अंदर कितनी भी ताकत और हुनर क्यों न हो, हम कोशिश करना ही छोड़ देते हैं।
असल में हमारी सबसे बड़ी कैद कोई रस्सी नहीं होती, बल्कि हमारे मन का डर होता है।
अगर हाथी एक बार फिर पूरी ताकत से कोशिश करे, तो वह पलभर में आजाद हो सकता है। ठीक उसी तरह इंसान भी अगर अपने डर और पुरानी असफलताओं से बाहर निकल आए, तो वह जिंदगी में कुछ भी हासिल कर सकता है।