बाड़े की कील

गांव के किनारे एक पुराना घर था, जिसके पीछे लकड़ी का बड़ा-सा बाड़ा बना हुआ था। उस बाड़े में वर्षों पुरानी जंग लगी कीलें ठुकी हुई थीं। गांव वाले कहते थे कि उस बाड़े की आखिरी कील में कोई रहस्य छिपा है।

बाड़े की कील

रवि, जो शहर से गर्मियों की छुट्टियों में गांव आया था, इन बातों को सिर्फ अंधविश्वास मानता था। एक रात दादी ने उसे चेतावनी देते हुए कहा,
“उस बाड़े की आखिरी कील को कभी मत छेड़ना।”

रवि हंस पड़ा।
“दादी, एक कील में ऐसा क्या हो सकता है?”

दादी ने धीमी आवाज़ में कहा,
“क्योंकि वो सिर्फ कील नहीं है… किसी को बांधकर रखने का सहारा है।”

उस रात तेज बारिश हो रही थी। हवा की आवाज़ के बीच रवि को लगा जैसे कोई बाहर से बाड़े पर खरोंच मार रहा हो। उसने खिड़की से झांका, लेकिन वहां कोई नहीं था।

अचानक उसे बाड़े की तरफ से किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। जिज्ञासा में वह टॉर्च लेकर बाहर निकल गया।

बाड़े के पास पहुंचते ही उसकी टॉर्च बार-बार झपकने लगी। तभी उसकी नजर आखिरी कील पर गई। बाकी सभी कीलें जंग लगी थीं, लेकिन वह एकदम नई दिख रही थी।

रवि ने हाथ बढ़ाकर उसे छू लिया।

जैसे ही उसने कील को हिलाया, अचानक हवा रुक गई। पूरा वातावरण डरावनी खामोशी में बदल गया। फिर पीछे से किसी औरत की भारी आवाज़ आई—
“उसे मत निकालो…”

रवि घबरा गया और पीछे मुड़ा, लेकिन वहां कोई नहीं था।

उसने जल्दी से कील छोड़ दी, पर तभी उसे महसूस हुआ कि उसके पैरों के नीचे मिट्टी हिल रही है। धीरे-धीरे जमीन से किसी का हाथ बाहर निकलने लगा।

रवि डर के मारे पीछे हट गया। मिट्टी में दबा चेहरा बाहर आया। वह एक बूढ़ी औरत थी, जिसकी आंखें पूरी सफेद थीं।

“मुझे आज़ाद कर दो…” उसने फुसफुसाते हुए कहा।

रवि कांपने लगा। तभी दादी दौड़ती हुई वहां पहुंचीं। उन्होंने रवि को पीछे खींच लिया और जोर से मंत्र पढ़ने लगीं।

बूढ़ी औरत चीखने लगी।
“तुम लोगों ने मुझे इतने सालों से बांध रखा है!”

दादी ने रवि से कहा,
“ये औरत वर्षों पहले गांव में बच्चों को मार देती थी। गांव वालों ने तांत्रिक की मदद से इसकी आत्मा को इस बाड़े में कैद कर दिया था। ये आखिरी कील ही इसकी कैद है।”

लेकिन देर हो चुकी थी। कील आधी निकल चुकी थी।

अचानक बाड़ा जोर-जोर से हिलने लगा। सारी कीलें अपने आप बाहर गिरने लगीं। हवा में चीखें गूंज उठीं।

दादी ने कांपते हुए रवि से कहा,
“भागो!”

रवि और दादी घर की ओर भागे। पीछे मुड़कर देखा तो पूरा बाड़ा जमीन पर गिर चुका था। उस अंधेरे में सफेद आंखों वाली बूढ़ी औरत खड़ी मुस्कुरा रही थी।

अगली सुबह गांव वालों ने देखा कि रवि और उसकी दादी तो सुरक्षित थे…
लेकिन गांव के हर घर के दरवाजे पर एक नई जंग लगी कील ठुकी हुई थी।

और रात होते ही… उन कीलों से फिर वही खरोंचने की आवाज़ आने लगी।

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