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एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में गौरी नाम की एक वृद्ध महिला रहती थी। उम्र के उस दौर में जब इंसान को सहारे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, उस बूढ़ी माँ के पास न कोई बेटा था, न बहू, न ही कोई रिश्तेदार जो उसका हाल पूछे। लेकिन फिर भी, वह हर दिन मुस्कुराते हुए ईश्वर को धन्यवाद देती थी कि “कम से कम आज का दिन तो मिला है, किसी के काम आने के लिए।”
गांव के लोग गौरी को बहुत सम्मान से देखते थे क्योंकि वह हर गरीब और भूखे इंसान को खाना खिलाया करती थी। उसके पास ज़्यादा कुछ नहीं था—बस एक छोटी सी झोपड़ी, कुछ बर्तन, और रोज़ की एक रोटी बनाने लायक आटा।
एक दिन, जब तेज़ धूप पड़ रही थी और गांव में पानी की कमी थी, गौरी ने अपने ईश्वर की तस्वीर के सामने कहा – “भगवान, आज मेरे पास सिर्फ एक रोटी बची है। अगर कोई भूखा आएगा तो मैं वही रोटी उसे दे दूंगी, भले मैं खुद भूखी रह जाऊं।”
इतना कहकर वो रोटी सेंकने ही वाली थी कि तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।
“माँ, दो दिन से कुछ नहीं खाया… क्या थोड़ा सा खाने को मिलेगा?” — वह एक बूढ़ा अजनबी था, धूल से भरा शरीर, फटे कपड़े, मगर आंखों में उम्मीद की चमक।
गौरी ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, मेरे पास बस एक ही रोटी है, पर अगर तू भूखा है, तो ये तेरे लिए है।”
उसने वह रोटी उसे थमा दी और खुद पानी पीकर बैठ गई।
वो बूढ़ा आदमी रोटी खाते हुए बोला, “माँ, तेरे दिल में ईश्वर बसते हैं। तेरा उपकार मैं कभी नहीं भूलूँगा।”
और वह धीरे-धीरे आगे बढ़ गया।
अगले ही दिन, जब गौरी भूख और कमजोरी से थकी हुई थी, अचानक किसी ने उसके दरवाज़े पर थाली रख दी। उसमें गेहूं का एक थैला, दाल, चावल और गीली रोटी रखी थी। साथ में एक पत्ती पर लिखा था – “जो एक रोटी बांटता है, ईश्वर उसे सौ गुना लौटाता है।”
गौरी की आंखों में आंसू आ गए। उसने आसमान की तरफ देखा और कहा – “प्रभु, तेरी दया अपरम्पार है। तू सब देखता है, सब सुनता है।”
उस दिन से गौरी ने हर आने वाले भूखे को दिल से खिलाना शुरू किया और कभी उसके घर में अन्न की कमी नहीं हुई।
कहानी सिखाती है कि एक रोटी भी अगर सच्चे दिल से बाँटी जाए, तो वह जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद बन जाती है।
कहानी की सीख (Moral of the Story)
FAQs (सामान्य प्रश्न)
1: इस कहानी का मूल संदेश क्या है?
इस कहानी का संदेश है कि सच्ची दया और सहयोग कभी व्यर्थ नहीं जाते। जो दिल से देता है, उसे ईश्वर कई गुना लौटाता है।
2: ‘एक रोटी’ क्यों प्रतीक है?
‘एक रोटी’ त्याग, प्रेम और परोपकार का प्रतीक है—जो बताती है कि देने के लिए हमें अमीर होने की ज़रूरत नहीं है, बस दिल अमीर होना चाहिए।
3: क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है?
हाँ, जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो जीवन किसी न किसी रूप में हमें वापस देता है—कभी अवसर के रूप में, कभी किसी की मुस्कान में।
4:इस कहानी से बच्चों को क्या सिखाना चाहिए?
बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि दूसरों की मदद करना और साझा करना जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
5: क्या यह कहानी धार्मिक है या मानवीय?
यह कहानी मानवीय भावना पर आधारित है – दया, प्रेम और मानवता की कहानी।
10 प्रेरणादायक कोट्स (Motivational Quotes)
“God lives in the hearts of those who share.”
करुणा वह भाषा है जिसे हर दिल समझता है।
