नवरात्रि घट स्थापना 2026: 11 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री

💚 Daily Shayari & Wishes Free Me Pana Chahte Ho?

Rozana Romantic, Sad, Good Morning & Good Night Shayari ke liye hamara WhatsApp Channel join karein.

🔔 Daily Wishes Updates – Join Now
नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त 2026

शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना या कलश स्थापना के साथ पूजा का शुभारंभ होता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी।

अगर आप भी नवरात्रि में अपने घर पर कलश स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना की विधि, पूजा सामग्री, मां शैलपुत्री की पूजा और नवरात्रि से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।

नवरात्रि घट स्थापना 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2026 का पहला दिन 11 अक्टूबर, रविवार को है। इस दिन प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना की जाती है। पंचांग के अनुसार, मुंबई में कलश स्थापना के लिए निम्न समय बताया गया है।

  • नवरात्रि की शुरुआत: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
  • घट स्थापना का प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक
  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे

ये समय मुंबई के लिए प्रकाशित पंचांग की गणना पर आधारित हैं। अन्य शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के कारण समय में अंतर हो सकता है। पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुजारी से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।

घट स्थापना क्या है और इसका महत्व क्या है?

घट स्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है। यह नवरात्रि के आरंभ में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें पूजा स्थल पर पवित्र कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को शुभता, समृद्धि, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा, व्रत, आरती और मंत्र जाप का संकल्प लेते हैं।

कलश स्थापना के साथ कई घरों में जौ बोने और अखंड ज्योत जलाने की परंपरा भी होती है। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की विधि में अंतर हो सकता है।

कलश स्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री

नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें।

  1. मिट्टी का पात्र या चौड़ी थाली
  2. साफ मिट्टी और जौ के बीज
  3. तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
  4. शुद्ध जल या गंगाजल
  5. नारियल और आम के पत्ते
  6. लाल कपड़ा या चुनरी
  7. रोली, कुमकुम और हल्दी
  8. अक्षत यानी साबुत चावल
  9. मौली या कलावा
  10. फूल और माला
  11. पान, सुपारी और सिक्का
  12. दीपक, घी या तेल और रुई की बत्ती
  13. धूप और अगरबत्ती
  14. फल, मिठाई और प्रसाद
  15. मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा
  16. पूजा की थाली और आसन

ध्यान रखें कि पूजा सामग्री की सूची स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। अखंड ज्योत जलाने की योजना हो, तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था पहले से कर लें।

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें? जानिए पूजा विधि

1. पूजा स्थल की सफाई करें

सबसे पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें। स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा के लिए एक शांत स्थान चुनें। पूजा चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

2. जौ बोने की तैयारी करें

एक साफ पात्र में मिट्टी डालें और उसमें जौ के बीज बो दें। मिट्टी में आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी डालें। नवरात्रि के दौरान जौ में होने वाली वृद्धि को कई परंपराओं में शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।

3. कलश तैयार करें

कलश को साफ करके उसमें परंपरा के अनुसार जल भरें। इसमें गंगाजल, अक्षत, सुपारी और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम या अन्य उपयुक्त पत्ते लगाएं और उसके ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल कपड़े या मौली से सजाया जा सकता है।

4. कलश को स्थापित करें

तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास या उसके ऊपर, अपनी पारिवारिक पूजा पद्धति के अनुसार स्थापित करें। कलश रखते समय मां दुर्गा का ध्यान करें और पूजा सफलतापूर्वक पूरी होने की प्रार्थना करें।

5. मां दुर्गा का आह्वान करें

हाथ जोड़कर मां दुर्गा का ध्यान करें। गणेश जी का स्मरण करने के बाद संकल्प लें कि आप श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार नवरात्रि की पूजा करेंगे।

6. मां शैलपुत्री की पूजा करें

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें फूल, अक्षत, धूप, दीप और फल-मिठाई अर्पित करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की कथा या स्तुति का पाठ करें।

7. आरती और प्रसाद वितरण करें

पूजा पूरी होने पर मां दुर्गा की आरती करें और परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद बांटें। नवरात्रि के अगले आठ दिनों तक अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार पूजा जारी रखें।

मां शैलपुत्री का मंत्र

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

मंत्र का जाप शांत मन और श्रद्धा के साथ करें। पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा या मां दुर्गा की अन्य स्तुतियों का पाठ भी किया जा सकता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में किन देवियों की पूजा होती है?

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है।

  1. पहला दिन — मां शैलपुत्री
  2. दूसरा दिन — मां ब्रह्मचारिणी
  3. तीसरा दिन — मां चंद्रघंटा
  4. चौथा दिन — मां कूष्मांडा
  5. पांचवां दिन — मां स्कंदमाता
  6. छठा दिन — मां कात्यायनी
  7. सातवां दिन — मां कालरात्रि
  8. आठवां दिन — मां महागौरी
  9. नौवां दिन — मां सिद्धिदात्री

नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं और देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं।

नवरात्रि में व्रत रखते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • पूजा और व्रत के दौरान स्वच्छता बनाए रखें।
  • सात्त्विक भोजन ग्रहण करें और अपने व्रत के नियमों का पालन करें।
  • अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करें।
  • पूजा स्थल और दीपक के आसपास सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • अखंड ज्योत जलाने पर उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और आग से संबंधित सावधानियां बरतें।
  • पूजा सामग्री और व्रत के नियमों में परिवार की परंपरा का सम्मान करें।
  • किसी कारण से पूजा में देरी होने पर घबराने के बजाय स्थानीय पंचांग और जानकार पुजारी से मार्गदर्शन लें।

नवरात्रि घट स्थापना 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगी।

2. 11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना का शुभ समय क्या है?

मुंबई के लिए प्रकाशित पंचांग के अनुसार, प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक बताया गया है। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है।

3. घट स्थापना के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

मुख्य सामग्री में कलश, जल, नारियल, पत्ते, जौ, मिट्टी, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप और प्रसाद शामिल हैं।

4. नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा की जाती है?

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

5. क्या नवरात्रि में जौ बोना जरूरी है?

जौ बोना कई परिवारों में प्रचलित परंपरा है। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसका पालन करें।

6. अगर सुबह घट स्थापना न कर पाएं तो क्या करें?

मुंबई के पंचांग में दोपहर 12:01 से 12:49 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से इसकी पुष्टि करें और आवश्यक हो तो पुजारी से सलाह लें।

निष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की भक्ति, श्रद्धा और साधना का अवसर है। 11 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ पूजा का शुभारंभ किया जाएगा। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करें।

मां दुर्गा से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में सुख, शांति और मंगल बना रहे।

जय माता दी!

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

This will close in 0 seconds

Bot
🔔 Daily Wishes Updates – Join Now